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पिछले चार वर्ष से मैं स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए स्थानीय नौकरियों में एवं स्थानीय शैक्षणिक संस्थाओं में नामांकन हेतु स्थानीय आरक्षण की मांग कर रहा था, परन्तु अभी तक यह लागू नहीं हो पाया था। आज मुझे इस बात की खुशी है कि प्रारंभिक स्कूलों में शिक्षकों के बहत्तर हजार रिक्तियों पर नियुक्ति होने वाला है उसमें बिहार के निवासियों के लिए ही आवेदन मांगा गया है ये मेरे प्रयास का जीत है। मैंने अकेले इस लड़ाई को पिछले चार साल से लड़ता रहा और इसमें सफलता मुझे मिलना शुरू हो गया है। मैंने लगातार इसके लिए प्रयास किया और इस विषय को सदन के अंदर कई बार प्रश्न के माध्यम से, ध्यानाकर्षण के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट किया परन्तु सरकार इस पर अभी तक कार्रवाई शुरू नहीं कर पाई थी, लेकिन प्रारंभिक शिक्षकों के लिए जो बहाली निकली है उसमें बिहार के अभ्यर्थियों को ही आवेदन करना है इससे यह साबित हो गया है कि सरकार अब स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण को लागू करने के लिए तत्पर दिख रही है। मैंने सरकार का ध्यान इस तरफ आकृष्ट किया था कि बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा जो लेक्चरर की बहाली हुई थी, उसमें से अंग्रेजी विषय में नब्बे प्रतिशत सीट केरला के बच्चे ले गए हैं जबकि फिजिक्स में बंगाल के अधिकांश बच्चे सफल घोषित हुए हैं इसी तरह मैथिली विषय में भी बीस प्रतिशत से अधिक सीट दूसरे राज्य के बच्चे ले गए हैं इसी तरह न्यायिक सेवा की जो बहाली हुई है बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा उसमें भी चालीस प्रतिशत से अधिक सीट दूसरे राज्य के बच्चे ले गए हैं, इससे पहले शिक्षकों की बहाली के लिए जो टेस्ट लिया गया था उसमें भी पैंतीस से चालीस प्रतिशत सीट बगल के राज्यों के बच्चे ले गये है जो कि दुर्भाग्य का विषय है।इस विषय में मैंने माननीय मुख्यमंत्री जी को कई बार पत्र लिखकर ध्यान आकृष्ट किया था कि पूरे देश में 16 से अधिक राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, मध्य प्रदेश में स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए स्थानीय नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में नामांकन हेतु स्थानीय आरक्षण की व्यवस्था है कहीं पर 75 प्रतिशत, कहीं पर 80 प्रतिशत, कहीं पर 90 प्रतिशत एवं कहीं पर 100 प्रतिशत आरक्षण लागू है। आप भी बिहार के अंदर कम से कम स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए 90 प्रतिशत आरक्षण लागू करें, परंतु अभी तक आरक्षण लागू नहीं हो पाया था। मैं पुनः माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह करता हूं कि बिहार के बच्चे दूसरे राज्य में पांच प्रतिशत दस प्रतिशत सीट के लिए मार खाते हैं, गाली सुनते हैं फिर भी नौकरी नहीं मिल पाती है, कम से कम अपने राज्य की नौकरियों में स्थानीय अभ्यर्थियों को मौका दीजिये, जिससे अपने राज्य की नौकरी में भी ये लोग शत प्रतिशत प्राप्त कर सकें। साथ ही मैं यह भी मांग करता हूं कि राज्य के अंदर जितनी भी बहालियां हो रही है, उसमें सभी पद तथा चतुर्थ वर्गीय पद, तृतीय वर्गीय पद, द्वितीय वर्गीय पद एवं बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा जितनी भी नियुक्ति हो रही है इन सभी पदों पर स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण नब्बे प्रतिशत लागू होना चाहिए इसी तरह सरकार के जितने भी शैक्षणिक संस्थान है उसमें भी नामांकन में नब्बे प्रतिशत स्थानीय अभ्यर्थियों के द्वारा भरा जाना चाहिए ।